18 जुलाई 2011

जरूरी अपील

जन कलाकार जीतन को न्याय चाहिए !

वो जो कल तक आम लोगों के बीच मेहनतकश समुदाय के दुःख-दर्द और उनकी जिन्दगी के जद्दो-जहद को अपना सांस्कृतिक स्वर देता था... खेत-खलिहानकारखाने-खदान से लेकर गांव, देहात, कस्बों, शहरों में अपनी सांस्कृतिक मण्डली के साथ घूम-घूमकर, पतनशील व मानव विरोधी संस्कृति के बरखिलाफ जन संस्कृति के गीत गाता है... जल-जंगल-जमीन तथा जीवन पर अधिकार के लिए हूल-उलगुलान के सपनों को शोषित-वंचित आदिवासी एवं मेहनतकश जन समुदाय के बीच जगाता रहा तथा लूट-झूठ की सत्ता से हताश, निराश और परेशान  दिलों में अपनी धन-धरती पर अधिकार और मर्यादापूर्ण जीवन के लिए परिवर्तन  का जोश भरता रहा... और रात के विरुद्ध प्रात के लिए, भूख के विरुद्ध भात के लिए नये राज-समाज गढ़ने के अभियान में चेतना का संगीत सजाता रहा..... उस जन कलाकार जीतन मरांडी को झूठे केस में फंसाकर कलाकर से कातिल ठहराया गया और फांसी का हुक्म सुनाया गया। जीतन मरांडी ने अपसंस्कृति के विरुद्ध जन संस्कृति के लिए सदैव मांदर, ढोल, नगाड़ाबांसुरी और कलम-कूची को अपना हथियार बनाया। लेकिन उसे झूठे गवाहों के बल पर उग्रवादी साबित किया गया। एक जन कलाकार के रूप में उसने संस्कृतिकर्म की वही राह अपनायी जिसे कबीर, भारतेन्दू हरिश्चन्द्र से लेकर मुंशी प्रेमचन्द और नागार्जुन की रचना-सांस्कृतिक परम्परा ने दिखलायी। वही संकल्प रखा जिसे सिद्धू-कानू, बिरसा मुण्डा और भगत सिंह के आदर्शों ने सिखलाया। जो यही काली ताकतों को नहीं भाया। प्रसिद्ध गीतकार शैलेन्द्र ने वर्षों पूर्व लिखा था –

"
भगत सिंह इस बार न लेना काया भारतवासी की
देशभक्ति के लिए आज भी सजा मिलेगी फाँसी की"

आज जीतन मरांडी के साथ यही चरितार्थ हो रहा है। उसने देश की
सम्प्रभुता-स्वतंत्रता और लोकतंत्र  का अपहरण करनेवाली शासन-व्यवस्था और
सत्ता-संस्कृति के विरुद्ध जन संस्कृतिकर्म की मशाल जलायी। आईये, जन कलाकार जीतन
मरांडी को सही न्याय दिलाने तथा उसे फांसी की सजा से मुक्त कराने के जन अभियान
में हर स्तर पर सक्रिय भूमिका में हम सब आगे आयें!

निवेदक

जन कलाकार जीतन रिहाई मंच
अनिल अंशुमन,
संयोजक

संदर्भ: विभिन्न जनान्दोलनों में सक्रिय रहने वाले जनकलाकार जीतन मरांडी पर यों तो कई झूठे मुकदमे सरकार-प्रशासन द्वारा पहले ही लादे जाते रहे हैं। 2008 में गिरिडीह जिले के चिलखारी जनसंहार कांड के प्रमुख अभियुक्तों में स्थानीय
प्रशासन व भ्रष्ट राजनेता-बिचौलियों    ने साजिश कर जीतन मरांडी को फंसा दिया। 2009 में रांची से जीतन को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। गिरीडीह की निचली अदालत में एकतरफा एवं झूठी गवाही दिलवाकर 23 जून 2011 को फांसी की सजा सुनायी गयी। चूंकि जीतन मरांडी झारखण्ड में कोरपोरेट लूट और झूठ की सरकारों की जनविरोधी नीतियों संघर्ष की सांस्कृतिक आवाज बुलंद करते थे और ग्रामीण-आदिवासी जनता में लोकप्रिय थे। इसलिए वे लूट-झूठ की शक्तियों की आंखों की किरकिरी बन गये थे।

प्रचारित-प्रसारित:
झारखण्ड जन संस्कृति मंच, संपर्क: 09939081850,
anshuman.anil@gmail.com

विज्ञप्ति ई-मेल द्वारा प्राप्त- दख़ल

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