मुंबई: 11 फ़रवरी को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में शाम 5 बजे से अहमदाबाद के मशहूर वकील और एक्टिविस्ट मुकुल सिन्हा पहले शाहिद आज़मी स्मृति व्याख्यान में लोगों को संबोधित करेंगे। गोधरा जनसंहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और गोधरा की घटना के बाद मुसलमानों के ख़िलाफ़ हुई बर्बर कार्रवाई को उजागर करने के अलावा गुजरात के भीतर हुई कई फ़र्जी मुठभेड़ों को प्रकाश में लाने वाले मुकुल सिन्हा 'विभ्रम जिसे धर्मनिरपेक्षता कहते हैं" (The illusion called Secularism) के विषय पर बोलेंगे।
मुंबई में रहने वाले 32 वर्षीय युवा वकील शाहिद आज़मी की उनके दफ़्तर में 11 फरवरी 2010 को कुछ 'अनजान" लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। शाहिद के एक क़रीबी मित्र के मुताबिक, शाहिद बाकी वकीलों की तरह नहीं थे जो महज पैसा कमाने के लिए वकालत करते हैं। वो न्याय के लिए निडरता से लड़ते थे। उन्होंने मालेगांव विस्फोट मामले के फ़र्जी आरोपितों सहित आंतकवाद से संबंधित कई मुकदमें लड़े।
व्याख्यान की अध्यक्षता जाने-माने स्कॉलर प्रोफ़ेसर जैरस बैनेजी करेंगे जो लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ में पढ़ाते हैं। इस अवसर पर अन्य वक्ता हैं - वरिष्ठ पत्रकार अजीत साही, मुंबई हाई कोर्ट के अधिवक्ता मिहिर देसाई, जमीअत लीगल सेल, महाराष्ट्र के सचिव मौलाना गुलज़ार आज़मी और शाहिद आज़मी के बड़े भाई आरिफ़ आज़मी।
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